Tuesday, April 14, 2020

आईये मुंबई के बांद्रा में जमा हुए भीड़ की थोड़ी पड़ताल करें

आईये मुंबई के बांद्रा में जमा हुए भीड़ की थोड़ी पड़ताल करें -

(अमूमन मान लिया जाता है कि मजदूर हैं तो बिहार - उत्तर प्रदेश के ही होंगें.  अघोषित तौर पर ही सही हम भी यही मान कर चलते हैं.)

1. बांद्रा, मुंबई के पॉश इलाक़े में आता है बोले तो विआईपी. मशहूर अभिनेता शाहरुख़ खान का यहीं रहते हैं. आम तौर पर यहां मजदूर कम ही रहते हैं और जो रहते हैं वो फिल्म सिटी से जुड़े होते हैं.

2. बांद्रा से ऐसी कोई ट्रेन नहीं चलती है जो बिहार या यूपी आती हो. यह स्टेशन पूरी तरह से लोकल ट्रेनों के लिए बनी है. बिहार-उत्तरप्रदेश आने वाले लोग कल्याण, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुबई सेन्ट्रल, ठाणे आदि स्टेशनों से ट्रेन पकड़ते हैं. चुकि अभी मुंबई की लोकल ट्रेन भी बंद है तो किसी भी यात्री का 'बांद्रा' आने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

3. जैसा कि दावा किया जा रहा है कि ये प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन किसी भी वीडियो फुटेज में भीड़ में शामिल व्यक्ति के पास कोई सामान नहीं है. क्या ऐसा हो सकता है कि प्रवासी मजदूर अपने घर आ रहे हों और उनके पास कोई सामान नहीं हो? कतई नहीं.

उपरोक्त तीनों तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यही निष्कर्ष निकलता है कि भीड़ वहां खुद नहीं आई थी बल्कि जान-बूझ कर लाई गयी थी. कुछ सूत्र ये भी बताते हैं कि भीड़ जिस मस्जिद के पास जमा हुयी थी उसी मस्जिद के लाऊडस्पीकर से ट्रेन वाली अफवाह फैलायी गयी.

मुंबई के चप्पे-चप्पे पर आम दिनों में भी पुलिस तैनात रहती है. लॉकडाउन के होने के कारण मुस्तैदी अधिक ही है. इसके बावजूद भीड़ बाहर निकलती है और पुलिस देखती रहती है जाहिर है कि पुलिस को कोई एक्सन ना लेने का आदेश ऊपर से आया होगा!

बिहार और यूपी के मजदूरों के साथ ऐसा क्यूं किया जा रहा है?

उत्तर - 'राजनीति', ये कुछ भी करवा सकती है. बिहार और उत्तरप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति देश में सबसे ख़राब है. वहीँ दोनों ही राज्यों की जनसंख्या, अशिक्षा, गरीबी तमाम ऐसी चीजें हैं जो एक राज्य के लिए नकारात्मक ही हैं. इसके बावजूद भी दोनों ही राज्यों में तुलनात्मक दृष्टि से कोरोना के कम मामले आये हैं. कोरोना के मामले कम होने के जो भी कारण जो भी रहे हों पर सत्ता से अलग बैठी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को यह सब रास नहीं आ रहा. खास कर प्रशांत किशोर को. यदि बिहार में भी महामारी युद्धस्तर पर फैलती है तो प्रशांत किशोर को आगामी विधानसभा चुनाव में नितीश कुमार को घेरने का अच्छा बहाना मिल जायेगा.


प्रशांत किशोर की उद्धव ठाकरे से नजदीकी किसी से छिपी नहीं है. बिहारी मजदूरों को लेकर इसी तरह का ताम झाम पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी किया था. अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत किशोर का सम्बन्ध भी जग जाहिर है. गत दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर जी केजरीवाल के लिए चुनाव मेनेजमेंट संभाल चुके हैं. प्रशांत किशोर के ममता बनर्जी से भी अच्छे रिश्ते हैं. इसलिए हो सकता है कि दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर कोलकत्ता में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिले!!